Thursday, August 8, 2019


वो रास्ता


भूल आया मै
वो रास्ता
जहा कभी घर था मेरा

चाहतों ने क्या से क्या बना दिया







Monday, August 5, 2019

सूरज और काली रात

सूरज ने काली रात को भी न जाने कहा भगा दिया 
रात भर जागा हू,
तड़के जैसे ही सोया हू 
कम्भकत ने मुझे ही क्यों जगा दिया 

कोई बादलों को बुलाये 
आज मै  थोड़ी देर सो जाऊ 

थोड़ा सा वक़्त मिल जाये 
फिर से इस नींद के हवाले हो जाऊ 

सफ़र की शुरुवात हो गयी आज के 
दिल करता है आज काम  पे थोड़ा देर से जाऊ   


टूटे हुए टुकड़े

धूल भरी आंधी में
आज मेरी मंज़िल भी अड़ सी गयी है
रोक रखा है इस  धूमिल हवा ने
मेरा भी इरादा आज रुकने का नहीं
लग रहा हो जैसे ये भी अड़ गयी है
मुझे ही रोकना इसका इरादा बन गया



दोस्तों का साथ नहीं अब
काफी वक़्त जो हो गया कॉलेज से निकले
मिलते है कभी साल में

उन पुरानी यादों और बातों में
मेरी नींद ही तो है जो आज भी वैसी ही है






Friday, August 2, 2019

रिश्ते

रिश्तों में अक्सर पैमाने नहीं होते 
जहाँ पैमाने होते 
वो रिश्ते पुराने नहीं होते______

तुमने भी अगर 
न रखा होता हमसे ये फैसला 
तो आज
तुम्हारे पास भी हमसे मिलने के बहाने होते 





मखमली सुबह


मैं ने अक्सर रास्तों पर
उड़ते परिंदों को देखा है
न घर है न कोई ठिकाना इनका
बड़ी ही बेबाक सी जिंदगी है


Thursday, August 1, 2019

खुद के साथी

 खो जायेगा जो भी है तुम्हारे पास, 
सब छोड़ जायेंगे एक दिन तुम्हारा साथ, 
बन सको तो खुद के साथी बनो, 
तुम से अच्छा देगा न कोई तुम्हारा साथ। 


मुसाफिर हूँ मै

सुनहली धूप बन कर आया हूँ 
गुलाबी शाम की तरह ढल जाऊंगा 
मुसाफिर हूँ मै,
दिल में बसा लेना मुझको,
अपना बना कर भी 
अपना न पाउँगा। 

सफ़र सफ़र में याद बनी कोई, कोई बनी उम्मीद किसने सोचा था, घर से निकलना होगा, अब याद सी हो गई है  घर की  दहलीज...