सफ़र
सफ़र में
याद बनी कोई,
कोई बनी उम्मीद
किसने सोचा था,
घर से निकलना होगा,
अब याद सी हो गई है
घर की दहलीज...
आये कुछ हसीन ख्वाबों की एक दुनिया हर कोई डुबने की तम्मना रखता है मै और तुम भी इस सफर के राही है मुझे ख्याल आया क्यों न इन ख्वाबों को एक आकार दूँ
सफ़र सफ़र में याद बनी कोई, कोई बनी उम्मीद किसने सोचा था, घर से निकलना होगा, अब याद सी हो गई है घर की दहलीज...