Thursday, August 8, 2019


वो रास्ता


भूल आया मै
वो रास्ता
जहा कभी घर था मेरा

चाहतों ने क्या से क्या बना दिया







No comments:

Post a Comment

सफ़र सफ़र में याद बनी कोई, कोई बनी उम्मीद किसने सोचा था, घर से निकलना होगा, अब याद सी हो गई है  घर की  दहलीज...