Sunday, September 3, 2023

सफ़र


सफ़र में

याद बनी कोई,
कोई बनी उम्मीद

किसने सोचा था,
घर से निकलना होगा,

अब याद सी हो गई है 
घर की दहलीज...




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सफ़र सफ़र में याद बनी कोई, कोई बनी उम्मीद किसने सोचा था, घर से निकलना होगा, अब याद सी हो गई है  घर की  दहलीज...