Monday, August 5, 2019

सूरज और काली रात

सूरज ने काली रात को भी न जाने कहा भगा दिया 
रात भर जागा हू,
तड़के जैसे ही सोया हू 
कम्भकत ने मुझे ही क्यों जगा दिया 

कोई बादलों को बुलाये 
आज मै  थोड़ी देर सो जाऊ 

थोड़ा सा वक़्त मिल जाये 
फिर से इस नींद के हवाले हो जाऊ 

सफ़र की शुरुवात हो गयी आज के 
दिल करता है आज काम  पे थोड़ा देर से जाऊ   


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